भारत में विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. की बैठक: एकजुटता की कोशिशें, लेकिन दूरी की सियासत
भारतीय राजनीति में इन दिनों विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. (Indian National Developmental Inclusive Alliance) की चर्चा हर तरफ है। दिल्ली में होने वाली गठबंधन की बड़ी बैठक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। खबरों के मुताबिक, इस बैठक में 23 राजनीतिक दलों के नेता शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना है। यह बैठक इसलिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ एक मंच पर आने की कोशिश में जुटे हैं। हालांकि, इसी गठबंधन के भीतर कई सवाल खड़े हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सभी विपक्षी दल वाकई एक साथ चलेंगे, या फिर यह एकजुटता सिर्फ चुनावी जरूरतों के लिए है। इस बीच जो ताजा खबरें आई हैं, उनमें द्रमुक (DMK) ने साफ कर दिया है कि वह विपक्ष का हिस्सा जरूर है, लेकिन फिलहाल I.N.D.I.A. गठबंधन की बैठकों में शामिल नहीं होगा। द्रमुक की ओर से यह बयान गठबंधन के लिए एक झटका माना जा रहा है। पार्टी ने यहां तक कहा है कि 'कांग्रेस ने हमें धोखा दिया', और इसलिए हम इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। यही नहीं, सीपीआई (एम) ने भी बैठक से पहले अपनी नाखुशी जाहिर की है। पार्टी का कहना है कि कुछ मुद्दों पर गठबंधन के भीतर सहमति नहीं बन पा रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) भी अलग मोड में नजर आ रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रमुक के बीच जिस तरह दूरी बनती दिख रही है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विपक्षी गठबंधन को अभी बहुत मजबूत होना बाकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब तक सीट बंटवारे और साझा न्यूनतम कार्यक्रम (Common Minimum Programme) जैसे मुद्दों पर सभी दल सहमत नहीं होते, तब तक यह गठबंधन पूरी तरह एकजुट नहीं दिखेगा। वहीं, सत्ता पक्ष की बात करें तो भाजपा ने कांग्रेस पर कई मुद्दों पर हमला तेज कर दिया है। छत्तीसगढ़ के सीजीपीएससी घोटाले को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल पर सवाल उठाए हैं। भाजपा का आरोप है कि भूपेश बघेल के कार्यकाल में सीजीपीएससी में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ। वहीं कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है और कहा है कि भाजपा असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। दोनों दलों के बीच यह आरोप-प्रत्यारोप अब संसद के बाहर भी जारी है। इस बीच, सोशल मीडिया पर एक तस्वीर काफी वायरल हुई है। चुनावी कड़वाहट के बीच एक ट्रेन में भाजपा और कांग्रेस के नेता आमने-सामने बैठे दिखे। इस तस्वीर को देखकर सोशल मीडिया यूजर्स ने तरह-तरह के कमेंट्स किए। कुछ ने इसे सियासी शिष्टाचार का उदाहरण बताया, तो कुछ ने इसे चुनावी नाटक करार दिया। मध्य प्रदेश के दातिया से इस तरह की तस्वीरें सामने आई हैं, जहां भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। दातिया में कांग्रेस का उम्मीदवार भाजपा से आगे निकलने की बात कही जा रही है, वहीं भाजपा ने दावा किया है कि उसका जनाधार मजबूत है। गुजरात के मांजलपुर की बात करें तो वहां भी भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है। मांजलपुर सीट पर कौन आगे है और कौन पीछे, इसको लेकर लगातार अपडेट आ रहे हैं। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि किसी एक पार्टी को बढ़त मिलेगी। इसके अलावा, शहजाद पूनावाला का नाम भी चर्चा में है। ऐसी चर्चाएं हैं कि वह भाजपा छोड़ सकते हैं, हालांकि उन्होंने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। फिर भी, पार्टी के अंदर इसको लेकर हलचल मची हुई है। वहीं, एक नया नाम भारतीय राजनीति में छाया हुआ है - कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)। यह पार्टी अभिजीत दीपक नाम के एक युवा नेता के नेतृत्व में चर्चा में आई है। बीबीसी जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इसकी चर्चा की है। खबरों के मुताबिक, यह पार्टी सोशल मीडिया के जरिए तेजी से लोगों तक पहुंच बना रही है। अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के संस्थापक ने आरोप लगाया है कि भारत सरकार ने उनकी वेबसाइट बंद कर दी है। वहीं, कई लोग इस पार्टी को इंटरनेट की मजाकिया हरकत के तौर पर देखते हैं, तो कुछ युवा इसे गंभीरता से ले रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी पार्टियां युवा मतदाताओं का ध्यान खींचने में कामयाब होती हैं, लेकिन चुनावी तौर पर उनका कोई बड़ा असर नहीं होता। विपक्षी एकजुटता की कोशिशों को लेकर यह भी देखना होगा कि कांग्रेस और अन्य दल आपसी मतभेदों को कितनी जल्दी दूर कर पाते हैं। ममता बनर्जी ने पहले भी कई मौकों पर कहा है कि विपक्ष को एकजुट होना चाहिए, लेकिन साथ ही उन्होंने कांग्रेस की नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठाए हैं। सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच जिस तरह की मुलाकातें हुई हैं, उन्हें सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले अखिलेश यादव और राहुल गांधी की मुलाकात को भी गठबंधन के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने एक साथ दिखकर विपक्षी दलों को एकजुट होने का संदेश देने की कोशिश की है। कुल मिलाकर, भारतीय राजनीति में इस समय विपक्षी गठबंधन को लेकर उत्साह और सवाल दोनों हैं। एक तरफ जहां 23 दलों की बैठक होने वाली है, वहीं दूसरी तरफ द्रमुक, सीपीआई (एम) और जेएमएम जैसे दलों की नाराजगी गठबंधन के लिए चुनौती है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में विपक्षी दल अपने मतभेदों को कैसे सुलझाते हैं और क्या वे सच में एक साथ चुनाव लड़ने में कामयाब होते हैं। आगामी बैठक में जो फैसले होंगे, उन्हीं से तय होगा कि विपक्ष का अगला कदम क्या होगा। फिलहाल, सियासी समीकरण बदलते रहेंगे और हर नया अपडेट गठबंधन की दिशा तय करता रहेगा।
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